उडुपी रामचंद्र राव कौन है जीवन-चरित्र,जन्म, मृत्यु और किताबें Udupi Ramchandra Rao Biography in hindi, who is Udupi Ramchandra Rao
आज गूगल भारतीय मूल के प्रोफेसर और वैज्ञानिक उडुपी रामचंद्र राव का 89वीं जयंती मना रहा है। उडुपी रामचंद्र राव को लोग "भारत के सैटेलाइट मैन "के नाम से भी जानते हैं,तो आज हम जानेंगे कि कौन है उडुपी रामचंद्र राव और उनके पूरे जीवन के बारे में भी जानेंगे
उडुपी रामचंद्र राव कौन है
गाँव - अडामारू ( जन्म स्थान)
भारतीय मूल के जाने-माने प्रोफेसर और वैज्ञानिक उडुपी रामचंद्र राव का 10 मार्च 2021 को 89वीं जन्मदिवस मनाया जा रहा है। उडुपी रामचंद्र राव को "भारत के सैटेलाइट मैन " के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत विक्रम साराभाई के संरक्षण में ब्रह्मांडीय-किरण भौतिकीशास्त्र के रूप मे की थी।
उनका जन्म कर्नाटक राज्य के उडुपी जिले के अडामारू गाँव मे 10 मार्च 1932 को हुआ था। उन्हें व्यापक रूप से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का पिता माना जाता था।
डाॅक्टरेट पूरा करने के बाद, प्रोफेसर उडुपी रामचंद्र राव अमेरिका चले गए, जहाँ उन्होंने एक प्रोफेसर के रूप में काम और नासा के पायनियर्स और एक्सप्लोरर के विभिन्न शोधों पर प्रयोग किए।
1966 में भारत लौटने पर, वह 1972 में भारत के उपग्रह कार्यक्रम की अगुवाई करने से पहले, भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद में प्रोफेसर बने। उन्होंने भारत के पहले उपग्रह आर्यभट्ट के 1975 के 18 उपग्रहों के प्रक्षेपण की निगरानी की, जिसे डिजाइन और लॉन्च किया गया। संचार, सुदूर संवेदन और मौसम संबंधी सेवाएं प्रदान करने के लिए।
प्रोफेसर राव ने भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास और इसके व्यापक अनुप्रयोग संचार और प्राकृतिक संसाधनों की सुदूर संवेदन के लिए योगदान दिया।
प्रोफेसर राव भारतीय वैज्ञानिक और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) के अध्यक्ष थे। प्रोफेसर राव भारत के प्रथम अंतरिक्ष वैज्ञानिक थे,जिन्हें साल 2013 में 'सैटेलाइट हाॅल ऑफ द फेम' में तथा साल 2016 में 'आईएएफ हाॅल ऑफ फेम' में सम्मिलित किया गया था। निधन से पहले वे तिरुवनंतपुरम में स्थित भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान के कुलपति के रूप में कार्यरत थे।
प्रोफेसर राव ने भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष के रूप में 1984 से 1994 तक अपने देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को काफी उच्च स्तर पर पहुंचाया। उन्होंने 20 से अधिक उपग्रहों का विकास किया। जो ग्रामीण क्षेत्रों में संचार और मौसम संबंधी समस्याओं को हल करने में अहम भूमिका निभाई।
किस पुरस्कार से कब सम्मानित किया गया
अंतरिक्ष विज्ञान में प्रोफेसर राव के योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 1976 में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उसके बाद साल 2017 में उन्हें भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनका निधन 24 जुलाई 2017 को 85 वर्ष की आयु हो गया।
प्रोफेसर राव ने कई किताबें भी लिखी
प्रोफेसर राव ने ब्रह्मांडीय किरणें, अंतरग्रहीय भौतिकी, उच्च ऊर्जा खगोलिकी, अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं उपग्रह तथा राॅकेट प्रौद्योगिकी विषयों पर तीन सौ पचास (350) से भी अधिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी विषयों पर articles प्रकाशित किए और कई किताबें भी लिखी।
दोस्तों उम्मीद करते हैं कि इस पोस्ट से आपको पूरी तरह से जानकारियां मिली। अगर आपके मन में किसी भी तरह का सवाल हो तो आप हमसे comments सेक्शन में पूंछ सकते हैं ।


0 Comments